Kannappa Review : विष्णु मंचू की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘कन्नप्पा’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है और ये उन फिल्मों में से एक है जो दर्शकों को गहराई से भावुक कर देती है। अगर आप ‘OMG’ जैसी फिल्मों में दिखी ईश्वर की आधुनिक व्याख्या के साथ पौराणिकता को जोड़ने वाले सिनेमा के शौकीन हैं, तो ये फिल्म आपके लिए है। इस समीक्षा में हम जानेंगे कि क्यों ये फिल्म हर शिव भक्त के लिए एक जरूरी अनुभव बन जाती है।

💠 कहानी: एक नास्तिक से परम शिवभक्त बनने की यात्रा
यह फिल्म थिन्नाडु नामक एक शिकारी की कहानी है, जो शुरुआत में ईश्वर पर विश्वास नहीं करता। वो देवताओं को पत्थर मानता है और बलि जैसी परंपराओं का विरोध करता है। लेकिन उसके गांव के समीप स्थित एक प्राचीन वायुलिंग पर संकट आता है। इस पवित्र प्रतीक की रक्षा करते-करते थिन्नाडु का जीवन बदल जाता है। उसके भीतर शिव के प्रति ऐसी आस्था जागती है कि वह अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है। यह परिवर्तन दर्शकों को भीतर तक झकझोर देता है।
🎬 फिल्म का अनुभव: धीमी शुरुआत लेकिन विस्फोटक क्लाइमैक्स
करीब तीन घंटे की यह फिल्म कुछ स्थानों पर थोड़ी लंबी जरूर लगती है, खासतौर पर शुरुआत और मध्य में, लेकिन आखिरी के 30-40 मिनट ऐसे हैं कि पूरी फिल्म का अनुभव यादगार बना देते हैं। इन अंतिम दृश्यों में दर्शक शिव भक्ति के चरम रूप को महसूस करते हैं और आंखें नम हो जाती हैं।
फिल्म का ट्रीटमेंट दर्शकों को पुरानी पौराणिक कथा में आधुनिक दृष्टिकोण से ले जाता है। जहां शुरुआत एक स्थिर लय में चलती है, वहीं क्लाइमैक्स भावनाओं का तूफान बनकर आता है।
🎭 अभिनय: विष्णु मंचू से लेकर अक्षय कुमार तक सभी प्रभावशाली
- विष्णु मंचू ने थिन्नाडु/कन्नप्पा के रूप में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उनके अभिनय में दर्द, शक्ति और भक्ति का गहरा मिश्रण दिखता है।
- अक्षय कुमार भगवान शिव की भूमिका में संक्षिप्त लेकिन जबरदस्त प्रभाव छोड़ते हैं। उनका हर दृश्य दर्शकों पर गहरा असर डालता है।
- प्रभास का भी फिल्म में दमदार रोल है, जो हिंदी डबिंग के साथ शानदार बनता है।
- मोहनलाल और मोहन बाबू का योगदान छोटा लेकिन यादगार है।
- प्रीति मुकुंदन भी अपनी भूमिका में सशक्त नजर आती हैं।
🖋️ लेखन और निर्देशन: भक्ति के साथ कहानी कहने की सधी हुई कोशिश
फिल्म की कहानी और पटकथा विष्णु मंचू ने लिखी है जबकि निर्देशन किया है मुकेश कुमार सिंह ने। कहानी में दम है, लेकिन स्क्रीनप्ले को थोड़ा और कसाव दिया जा सकता था। खासकर फिल्म की लंबाई कम की जाती तो यह और अधिक प्रभावशाली हो सकती थी। फिर भी, अपने उद्देश्य को फिल्म बखूबी पूरा करती है—एक शिवभक्त की प्रेरणादायक कथा को लोगों तक पहुंचाना।
⭐ निष्कर्ष: भक्ति, भावना और बलिदान का अद्भुत संगम
‘कन्नप्पा’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि शिव भक्ति का सजीव अनुभव है। यह फिल्म बताती है कि भक्ति में क्या त्याग और शक्ति होती है। खासतौर पर हिंदी क्षेत्र के दर्शकों को यह फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए क्योंकि यह कहानी बहुतों के लिए नई होगी लेकिन इसका असर स्थायी रहेगा।
🎥 हमारी रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (3.5/5)
जरूर देखें यदि आप…
- शिव भक्त हैं
- प्रेरणादायक पौराणिक कथाएं पसंद करते हैं
- सिनेमा के ज़रिए आध्यात्मिक अनुभव चाहते हैं